महिला स्वयं सहायता समूह योजना (SHG)
महिलाओं को रोजगार, ऋण सुविधा और आत्मनिर्भरता का अवसर देने वाली योजना
महिला स्वयं सहायता समूह योजना क्या है?
महिला स्वयं सहायता समूह योजना (SHG) के तहत 10 से 20 महिलाएँ मिलकर एक समूह बनाती हैं जो मिलकर बचत, स्वरोजगार और लघु व्यवसाय शुरू करती हैं। यह योजना महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाती है।
योजना का उद्देश्य
- महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना।
- महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाना।
- महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना।
- स्वरोजगार और लघु उद्योगों से जोड़ना।
- गरीबी उन्मूलन और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना।
योजना के लाभ
- समूह के रूप में कार्य करने से सहयोग और विश्वास बढ़ता है।
- बिना गारंटी बैंक से ऋण सुविधा।
- सरकार द्वारा प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता।
- बचत और आय बढ़ाने का अवसर।
- आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सम्मान।
पात्रता
- महिला भारतीय नागरिक हो।
- आयु 18 से 60 वर्ष के बीच हो।
- समूह में 10 से 20 महिलाएँ हों।
- समूह का पंजीकरण पंचायत या बैंक से हो।
आवश्यक दस्तावेज
- आधार कार्ड
- राशन कार्ड / जन आधार
- निवास प्रमाण पत्र
- सदस्यों की सूची
- फोटो और बैंक पासबुक
ऋण और वित्तीय सहायता
- बिना गारंटी ऋण सुविधा
- पहले वर्ष में ₹1 लाख तक ऋण
- समय पर भुगतान पर ब्याज सब्सिडी
- सरकारी अनुदान और सहायता
आवेदन प्रक्रिया
ऑनलाइन
e-Mitra या CSC केंद्र से या राज्य पोर्टल के माध्यम से आवेदन करें।
ऑफलाइन
ग्राम पंचायत या नगर निकाय में आवेदन पत्र और दस्तावेज जमा करें।
योजना का महत्व
- महिलाओं में आत्मनिर्भरता बढ़ती है।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
- गरीबी में कमी आती है।
- महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिलती है।
चुनौतियाँ और समाधान
योजना के बेहतर क्रियान्वयन हेतु:
- महिलाओं के लिए जागरूकता अभियान।
- विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम।
- बाज़ार तक पहुँच आसान बनाना।
- ऋण प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनाना।
सफलता की कहानियाँ
अलवर की महिलाओं ने डेयरी से ₹50,000 मासिक कमाई शुरू की।
उदयपुर की महिलाओं ने पापड़-अचार उद्योग से रोजगार पाया।
जोधपुर की महिलाओं ने सिलाई-कढ़ाई से आत्मनिर्भरता हासिल की।
“जब महिलाएँ संगठित होती हैं, तो समाज की ताकत कई गुना बढ़ जाती है।”
